मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
रघुवंशम् • अध्याय 14 • श्लोक 39
तस्यापनोदाय फलप्रवृत्तावुपस्थितायामपि निर्व्यपेक्षः । त्यक्षामि वैदेहसुतां पुरस्तात्समुद्रनेमिं पितुराज्ञयेव॥
उस दोष को दूर करने के लिए, फल प्राप्ति की परवाह किए बिना, मैं वैदेही की पुत्री का त्याग करूँगा, जैसे मेरे पिता ने समुद्रपर्यन्त पृथ्वी का त्याग किया था।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रघुवंशम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

रघुवंशम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें