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रघुवंशम् • अध्याय 14 • श्लोक 3
आनन्दजः शोकजमश्रुबाष्पस्तयोरशीतं शिशिरो बिभेद । गङ्गासरय्वोर्जलमुष्णतप्तं हिमाद्रिनिस्यन्द इवावतीर्णः॥
आनन्द से उत्पन्न आँसू और शोक से निकला बाष्प मिलकर शीतलता को भेदते हुए ऐसे प्रतीत हुए मानो गंगा और सरयू का उष्ण जल हिमालय से उतर रहा हो।
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