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रघुवंशम् • अध्याय 14 • श्लोक 28
सा दष्टनीवारबलीनि हिंस्रैः संबद्धवैखानसकन्यकानि । इयेष भूयः कुशवन्ति गन्तुं भागीरथीतीरतपोवनानि॥
उसने कहा कि वह पुनः भागीरथी के तट के तपोवनों में जाना चाहती है, जहाँ वैखानस मुनियों की कन्याएँ रहती हैं और जहाँ हिंस्र जीवों द्वारा खाए हुए अन्न के दाने बिखरे रहते हैं।
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