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रघुवंशम् • अध्याय 14 • श्लोक 11
सौमित्रिणा सावरजेन मन्दमाधूतबालव्यजनो रथस्थः । धृतातपत्रो भरतेन साक्षादुपायसंघात इव प्रवृद्धः॥
रथ पर स्थित वह, लक्ष्मण द्वारा धीरे-धीरे झलाए जा रहे व्यजन से शीतल हो रहा था और भरत द्वारा धारण किए गए छत्र से ऐसा प्रतीत होता था मानो समस्त उपायों से सम्पन्न होकर महान् बना हो।
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