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रघुवंशम् • अध्याय 13 • श्लोक 60
पयोधरैः पुण्यजनाङ्गनानां निर्विष्टहेमाम्बुजरेणु यस्याः । ब्राह्मं सरः कारणमाप्तवाचो बुद्धेरिवाव्यक्तमुदाहरन्ति ॥
यह पवित्र सरोवर, जिसमें स्वर्ण कमलों का पराग भरा है, विद्वानों द्वारा ब्रह्म के कारण के समान अव्यक्त और गूढ़ बताया गया है।
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