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रघुवंशम् • अध्याय 13 • श्लोक 56
क्वचित्प्रभा चान्द्रमसी तमोभिश्छायाविलीनैः शबलीकृतेव । अन्यत्र शुभ्रा शरदभ्रलेखा रन्ध्रेष्विवालक्ष्यनभःप्रदेशा ॥
कहीं चंद्रमा की किरणें छाया में मिलकर धूमिल प्रतीत होती हैं, तो कहीं शरद ऋतु के बादलों के समान उज्ज्वल आकाश झलकता है।
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