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रघुवंशम् • अध्याय 13 • श्लोक 54
क्वचित्प्रभालेपिभिरिन्द्रनीलैर्मुक्तामयी यष्टिरिवानुविद्धा । अन्यत्र माला सितपङ्कजानामिन्दीवरैरुत्खचितान्तरेव ॥
कहीं यह इन्द्रनील मणियों से जड़ी हुई मोतियों की माला जैसा दिखता है, तो कहीं श्वेत कमलों की माला में नीलकमलों की सजावट के समान।
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