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रघुवंशम् • अध्याय 13 • श्लोक 53
त्वया पुरस्तादुपयाचितो यः सोऽयं वटः श्याम इति प्रतीतः । राशिर्मणीनामिव गारुडानां सपद्मरागः फलितो विभाति ॥
यह वही श्याम वटवृक्ष है जिसे तुमने पहले माँगा था; यह पद्मराग रत्नों से युक्त गरुड़मणियों के समूह के समान फलित होकर शोभित हो रहा है।
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