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रघुवंशम् • अध्याय 13 • श्लोक 40
तस्यायमन्तर्हितसौधभाजः प्रसक्तसंगीतमृदङ्गघोषः । वियद्गतः पुष्पकचन्द्रशालाः क्षणं प्रतिश्रुन्मुखराः करोति ॥
उसके अदृश्य भवनों से आती हुई संगीत और मृदंग की ध्वनि आकाश में स्थित पुष्पक विमान की दीवारों में गूँज उठती है।
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