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रघुवंशम् • अध्याय 13 • श्लोक 38
एतन्मुमुनेर्मानिनि शातकर्णेः पञ्चाप्सरो नाम विहारवारि । आभाति पर्यन्तवनं विदूरान्मेघान्तरालक्ष्यमिवेन्दुबिम्बम् ॥
यह शातकर्णि मुनि का पञ्चाप्सर नामक सरोवर है, जो दूर से वन के बीच ऐसे चमकता है जैसे बादलों के बीच चन्द्रमा।
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