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रघुवंशम् • अध्याय 13 • श्लोक 24
त्वं रक्षसा भीरु यतोऽपनीता तं मार्गमेताः कृपया लता मे । अदर्शयन्वक्तुमशक्नुवत्यः शाखाभिरावर्जितपल्लवाभिः ॥
हे भयभीत प्रिये, जिस मार्ग से तुम्हें राक्षस ले गया था, उन लताओं ने अपनी झुकी हुई शाखाओं से मानो दया करके मुझे वह मार्ग दिखाया।
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