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रघुवंशम् • अध्याय 13 • श्लोक 10
ससत्वमादाय नदीमुखाम्भः संमीलयन्तो विवृताननत्वात् । अमी तिरोभिस्तिमयः सरन्ध्रैरूध्वं वितन्वन्ति जलप्रवाहान् ॥
ये जलचर जीव नदियों के मुख का जल ग्रहण कर अपने खुले मुखों से ऊपर की ओर जलधाराएँ छोड़ते हैं।
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