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रघुवंशम् • अध्याय 12 • श्लोक 94
कृतप्रतिकृतप्रीतैस्तयोर्मुक्तां सुरासुरैः । परस्परशरव्राताः पुष्पवृष्टिं न सेहिरे॥
देवताओं और असुरों द्वारा प्रसन्न होकर की गई पुष्पवृष्टि को भी उनके परस्पर बाणों की वर्षा ने सहन नहीं होने दिया।
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