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रघुवंशम् • अध्याय 12 • श्लोक 93
विक्रमव्यतिहारेण सामान्याऽभूद्द्वयोरपि । जयश्रीरन्तरा वेदिर्मत्तवारणयोरिव॥
दोनों के पराक्रम के टकराव से विजयलक्ष्मी बीच में वैसे ही स्थिर हो गई, जैसे दो मतवाले हाथियों के बीच वेदी होती है।
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