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रघुवंशम् • अध्याय 12 • श्लोक 91
रावणस्यापि रामास्तो भित्त्वा हृदयमाशुगः । विवेश भुवमाख्यातुमुरगेभ्य इव प्रियम्॥
राम का तीव्र बाण रावण के हृदय को भेदकर धरती में ऐसे प्रवेश कर गया, मानो नागों को कोई प्रिय समाचार देने जा रहा हो।
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