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रघुवंशम् • अध्याय 12 • श्लोक 87
अन्योन्यदर्शनप्राप्तविक्रमावसरं चिरात् । रामरावणयोर्युद्धं चरितार्थमिवाभवत्॥
लंबे समय बाद एक-दूसरे को देखकर राम और रावण के बीच युद्ध ऐसा हुआ मानो दोनों का पराक्रम सफल हो गया हो।
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