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रघुवंशम् • अध्याय 12 • श्लोक 82
इतराण्यपि रक्षांसि पेतुर्वानरकोटिषु । रजांसि समरोत्थानि तच्छोणितनदीष्विव॥
अन्य राक्षस भी वानरों की सेना में गिर पड़े और युद्ध में उठी धूल उनकी रक्तरूपी नदियों में मिलती हुई प्रतीत हुई।
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