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रघुवंशम् • अध्याय 12 • श्लोक 81
अकाले बोधितो भ्राता प्रियस्वप्नो वृथा भवान् । रामेषुभिरितीवासौ दीर्घनिद्रां प्रवेशितः॥
मानो यह कहते हुए कि समय से पहले जगाया गया प्रिय स्वप्न व्यर्थ ही रहा, वह राम के बाणों से पुनः गहरी निद्रा में सुला दिया गया।
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