दधतो मङ्गलक्षौमे वसानस्य च वल्कले । ददृशुर्विस्मितास्तस्य मुखरागं समं जनाः॥
मंगल वस्त्र धारण करते समय और वल्कल पहनते समय भी लोगों ने उसके मुख की आभा को समान देखा और आश्चर्यचकित रह गए।
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