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रघुवंशम् • अध्याय 12 • श्लोक 74
अथ रामशिरश्छेददर्शनोद्भ्रान्तचेतनाम् । सीतां मायेति शंसन्ती त्रिजटा समजीवयत्॥
राम के सिर कटने का भ्रम देखकर मूर्छित हुई सीता को त्रिजटा ने यह कहकर होश में लाया कि यह सब माया है।
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