निर्वाप्य प्रियसंदेशैः सीतामक्षवधोद्धतः । स ददाह पुरीं लङ्कां क्षणसोढारिनिग्रहः॥
प्रिय संदेशों से सीता को संतुष्ट कर और अक्षयकुमार को मारकर, उसने शत्रुओं का दमन करते हुए लंका नगरी को जला डाला।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रघुवंशम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
रघुवंशम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।