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रघुवंशम् • अध्याय 12 • श्लोक 32
रावणावरजा तत्र राघवं मदनातुरा । अभिपेदे निदाघार्ता व्यालीव मलयद्रुमम्॥
वहाँ रावण की बहन शूर्पणखा कामातुर होकर राम के पास ऐसे आई, जैसे गर्मी से पीड़ित सर्प मलय पर्वत के वृक्ष की ओर जाता है।
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