तत्पश्चात कुम्भजन्मा अगस्त्य के आदेश से राम पंचवटी में ऐसे स्थिर होकर रहने लगे, जैसे विन्ध्य पर्वत अपनी स्वाभाविक स्थिति में स्थित रहता है।
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