संध्याभ्रकपिशस्तस्य विराधो नाम राक्षसः । अतिष्ठन्मार्गमावृत्य रामस्येन्दोरिव ग्रहः॥
संध्या के मेघ के समान वर्ण वाला विराध नामक राक्षस मार्ग रोककर खड़ा हो गया, जैसे ग्रह चन्द्रमा को आच्छादित कर लेता है।
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