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रघुवंशम् • अध्याय 12 • श्लोक 27
अनसूयातिसृष्टेन पुण्यगन्धेन काननम् । सा चकाराङ्गरागेण पुष्पोच्चलितषट्पदम्॥
अनसूया द्वारा दिए गए पवित्र सुगंध से युक्त होकर सीता ने अपने अंगराग से वन को ऐसा बना दिया कि फूलों पर मंडराते भौंरे भी चंचल हो उठे।
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