प्रभावस्तम्भितच्छायमाश्रितः स वनस्पतिम् । कदाचिदङ्के सीतायाः शिश्ये किंचिदिव श्रमात्॥
अपने तेज से छाया को रोक देने वाले राम कभी-कभी वृक्ष के नीचे सीता की गोद में मानो थोड़े से थके हुए विश्राम करते थे।
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