मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
रघुवंशम् • अध्याय 11 • श्लोक 87
तद्गतिं मतिमतां वरेप्सितां पुण्यतीर्थगमनाय रक्ष मे । पीडयिष्यति न मां खिलीकृता स्वर्गपद्धतिरमोघलोलुपम् ॥
अतः मेरे लिए उस श्रेष्ठ मार्ग को सुरक्षित रहने दो, जो बुद्धिमानों द्वारा इच्छित है और जो पुण्य तीर्थों की ओर जाता है; मेरे स्वर्गमार्ग को नष्ट मत करो।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रघुवंशम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

रघुवंशम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें