मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
रघुवंशम् • अध्याय 11 • श्लोक 82
तावुभावपि परस्परस्थितौ वर्धमानपरिहीनतेजसौ । पश्यति स्म जनता दिनात्यये पार्वणौ शशिदिवाकराविव ॥
वे दोनों आमने-सामने खड़े थे—एक का तेज बढ़ता हुआ और दूसरे का घटता हुआ—और जनता उन्हें संध्या समय चन्द्र और सूर्य के समान देख रही थी।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रघुवंशम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

रघुवंशम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें