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रघुवंशम् • अध्याय 11 • श्लोक 80
पूर्वजन्मधनुषा समागतः सोऽतिमात्रलघुदर्शनोऽभवत् । केवलोऽपि सुभगो नवाम्बुदः किं पुनस्त्रिदशचापलाञ्छितः ॥
पूर्व जन्म के धनुष के साथ संयुक्त होकर राम अत्यंत शोभायमान लगने लगे; जैसे नया बादल भी सुन्दर होता है, फिर देवताओं के धनुष से युक्त होने पर उसकी शोभा और बढ़ जाती है।
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