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रघुवंशम् • अध्याय 11 • श्लोक 79
एवमुक्तवति भीमदर्शने भार्गवे स्मितविकम्पिताधरः । तद्धनुर्ग्रहणमेव राघवः प्रत्यपद्यत समर्थमुत्तरम् ॥
ऐसे भयानक भार्गव के वचन सुनकर राम ने हल्की मुस्कान के साथ उसके धनुष को ग्रहण करना ही उचित उत्तर समझा।
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