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रघुवंशम् • अध्याय 11 • श्लोक 77
तन्मदीयमिदमायुधं ज्यया संगमय्य सशरं विकृष्यताम् । तिष्ठतु प्रधवमेवमप्यहं तुल्यबाहुतरसा जितस्त्वया ॥
अतः मेरे इस धनुष को भी प्रत्यंचा चढ़ाकर बाण सहित खींचो; यदि तुम ऐसा कर सको, तो मैं बिना युद्ध के ही तुम्हारे समान बल से पराजित मान लूँगा।
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