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रघुवंशम् • अध्याय 11 • श्लोक 76
विद्धि चात्तबलमोजसा हरेरैश्वरं धनुरभाजि यत्त्वया । खातमूलमनिलो नदीरयैः पातयत्यपि मृदुस्तटद्रुमम् ॥
यह जान लो कि तुमने जो धनुष धारण किया है, वह हरि के ऐश्वर्यबल से युक्त है; जैसे कोमल वायु भी नदी के किनारे के वृक्ष को जड़ से उखाड़ सकती है।
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