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रघुवंशम् • अध्याय 11 • श्लोक 73
अन्यदा जगति राम इत्ययं शब्द उच्चरित एव मामगात् । व्रीडमावहति मे स संप्रति व्यस्तवृत्तिरुदयोन्मुखे त्वयि ॥
पहले जब संसार में “राम” नाम सुनाई देता था, तो वह मेरे पास आता था; पर अब तुम्हारे उदय के साथ वही नाम मुझे लज्जा का कारण बन रहा है।
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