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रघुवंशम् • अध्याय 11 • श्लोक 7
मातृवर्गचरणस्पृशौ मुनेस्तौ प्रपद्य पदवीं महौजसः । रेचतुर्गतिवशात्प्रवर्तिनौ भास्करस्य मधुमाधवाविव ॥
माताओं के चरण स्पर्श कर वे दोनों तेजस्वी बालक मुनि के मार्ग पर चल पड़े और उनकी गति ऐसी शोभित हुई, जैसे सूर्य के साथ चलने वाले वसंत और ग्रीष्म ऋतु।
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