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रघुवंशम् • अध्याय 11 • श्लोक 66
अक्षबीजवलयेन निर्बभौ दक्षिणश्रवणसंस्थितेन यः । क्षत्रियान्तकरणैकविंशतेर्व्याजपूर्वगणनामिवोद्वहन् ॥
उसके दाहिने कान में अक्षबीज की माला शोभित हो रही थी, मानो वह क्षत्रियों के विनाश की संख्या को गिनने का संकेत दे रही हो।
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