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रघुवंशम् • अध्याय 11 • श्लोक 64
पित्र्यवंशमुपवीतलक्षणं मातृकं च धनुरूर्जितं दधत् । यः ससोम इव घर्मदीधितिः सद्विजिह्व इव चन्दनद्रुमः ॥
वह अपने पिता के वंश का सूचक यज्ञोपवीत और माता की ओर से प्राप्त शक्तिशाली धनुष धारण किए हुए था, जैसे सूर्य चन्द्रमा के साथ और चन्दन वृक्ष सर्प के साथ शोभित होता है।
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