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रघुवंशम् • अध्याय 11 • श्लोक 59
लक्ष्यते स्म तदनन्तरं रविर्बद्धभीमपरिवेषमण्डलः । वैनतेयशमितस्य भोगिनो भोगवेष्टित इव च्युतो मणिः ॥
तब सूर्य भयंकर आभामंडल से घिरा हुआ ऐसा दिखाई दे रहा था, मानो गरुड़ द्वारा दबाए गए सर्प के कुंडल से निकला हुआ मणि हो।
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