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रघुवंशम् • अध्याय 11 • श्लोक 57
एवमात्तरतिरात्मसंभवांस्तान्निवेश्य चतुरोऽपि तत्र सः । अध्वसु त्रिषु विसृष्टमैथिलः स्वां पुरीं दशरथो न्यवर्तत ॥
इस प्रकार अपने पुत्रों को उनके परिवार सहित स्थापित कर, तीन दिनों के बाद मिथिला से विदा लेकर दशरथ अपनी नगरी लौट आए।
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