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रघुवंशम् • अध्याय 11 • श्लोक 51
तस्य कल्पितपुरस्क्रियाविधेः शुश्रुवान्वचनमग्रजन्मनः । उच्चचाल बलभित्सखो वशी सैन्यरेणुमुषितार्कदीधितिः ॥
अपने अग्रज के वचन सुनकर, जो उचित स्वागत की व्यवस्था कर चुके थे, इन्द्र के समान पराक्रमी और संयमी दशरथ अपनी सेना के धूल से सूर्य की किरणों को ढँकते हुए आगे बढ़े।
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