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रघुवंशम् • अध्याय 11 • श्लोक 47
दृष्टसारमथ रुद्रकार्मुके वीर्यशुल्कमभिनन्द्य मैथिलः । राघवाय तनयामयोनिजां रूपिणीं श्रियमिव न्यवेदयत् ॥
रुद्र के धनुष में राम का सामर्थ्य देखकर और वीर्य को ही शुल्क मानकर मिथिला के राजा ने अपनी अयोनिजा पुत्री को लक्ष्मी के समान राम को समर्पित कर दिया।
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