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रघुवंशम् • अध्याय 11 • श्लोक 40
ह्रेपिता हि बहवो नरेश्वरास्तेन तात धनुषा धनुर्भृतः । ज्यानिघातकठिनत्वचो भुजान्स्वान्विधूय धिगिति प्रतस्थिरे ॥
उस धनुष को चढ़ाने में असमर्थ होकर अनेक राजा लज्जित होकर अपने कठोर भुजाओं को झटकते हुए धिक्कार करते हुए लौट गए।
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