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रघुवंशम् • अध्याय 11 • श्लोक 37
यूपवत्यवसिते क्रियाविधौ कालवित्कुशिकवंशवर्धनः । राममिष्वसनदर्शनोत्सुकं मैथिलाय कथयांबभूव सः ॥
यज्ञ समाप्त होने पर समय के ज्ञाता विश्वामित्र ने राम को धनुष दिखाने की इच्छा से जनक से बात की।
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