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रघुवंशम् • अध्याय 11 • श्लोक 35
राघवान्वितमुपस्थितं मुनिं तं निशम्य जनको जनेश्वरः । अर्थकामसहितं सपर्यया देहबद्धमिव धर्ममभ्यगात् ॥
राघवों सहित आए हुए मुनि के आगमन का समाचार पाकर राजा जनक ने अर्थ और काम सहित धर्म के साकार रूप के समान उनका आदरपूर्वक स्वागत किया।
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