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रघुवंशम् • अध्याय 11 • श्लोक 33
तैः शिवेषु वसतिर्गताध्वभिः सायमाश्रमतनुष्वगृह्यत । येषु दीर्घतपसः परिग्रहो वासवक्षणकलत्रतां ययौ ॥
मार्ग में वे सायंकाल उन आश्रमों में ठहरे, जहाँ दीर्घ तपस्या करने वाली स्त्रियाँ इन्द्र के समीप रहने योग्य बन चुकी थीं।
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