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रघुवंशम् • अध्याय 11 • श्लोक 30
इत्यपास्तमखविघ्नयोस्तयोः सांयुगीनमभिनन्द्य विक्रमम् । ऋत्विजः कुलपतेर्यथाक्रमं वाग्यतस्य निरवर्तयन्क्रियाः ॥
इस प्रकार यज्ञ के विघ्नों को दूर करने वाले उन दोनों के युद्धकौशल की प्रशंसा कर ऋत्विजों ने मुनि के निर्देशानुसार यज्ञ की क्रियाएँ पूर्ण कीं।
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