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रघुवंशम् • अध्याय 11 • श्लोक 28
सोऽस्त्रमुग्रजवमस्त्रकोविदः संदधे धनुषि वायुदैवतम् । तेन शैलगुरुमप्यपातयत्पाण्डुपत्रमिव ताडकासुतम् ॥
अस्त्रों में निपुण राम ने अपने धनुष पर वायुदेव का अस्त्र चढ़ाया और उससे पर्वत के समान भारी ताड़का के पुत्र को सूखे पत्ते की भाँति गिरा दिया।
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