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रघुवंशम् • अध्याय 11 • श्लोक 27
तत्र यावधिपती मखद्विषां तौ शरव्यमकरोत्स नेतरान् । किं महोरगविसर्पिविक्रमो राजिलेषु गरुडः प्रवर्तते ॥
वहाँ उन्होंने यज्ञ के शत्रुओं के केवल नेताओं को ही लक्ष्य बनाया, अन्य को नहीं; जैसे गरुड़ केवल बड़े सर्पों पर आक्रमण करता है, छोटे सर्पों पर नहीं।
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