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रघुवंशम् • अध्याय 11 • श्लोक 22
वामनाश्रमपदं ततः परं पावनं श्रुतमृषेरुपेयिवान् । उन्मनाः प्रथमजन्मचेष्टितान्यस्मरन्नपि बभूव राघवः ॥
तत्पश्चात वे मुनि से सुना हुआ पवित्र वामन आश्रम पहुँचे, जहाँ राघव अनायास ही अपने पूर्व जन्म की चेष्टाओं को स्मरण करने लगे।
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