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रघुवंशम् • अध्याय 11 • श्लोक 21
नैरृतघ्नमथ मन्त्रवन्मुनेः प्रापदस्त्रमवदानतोषितात् । ज्योतिरिन्धननिपाति भास्करात्सूर्यकान्त इव ताडकान्तकः ॥
ताड़का का वध करने वाले राम ने मुनि को प्रसन्न कर उनसे मंत्रयुक्त नैरृत-विनाशक अस्त्र प्राप्त किया, जैसे सूर्य से अग्नि उत्पन्न करने वाला सूर्यकांत मणि।
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