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रघुवंशम् • अध्याय 11 • श्लोक 20
राममन्मथशरेण ताडिता दुःसहेन हृदये निशाचरी । गन्धवद्रुधिरचन्दनोक्षिता जीवितेशवसतिं जगाम सा ॥
राम के कामदेव समान बाण से हृदय में आहत वह राक्षसी, रक्तरूपी चंदन से लिप्त होकर अपने जीवन के अंत स्थान को प्राप्त हुई।
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